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जनजाति कल्याण केंद्र बरगांव, महाकोशल छात्रावास के विद्यार्थियों का शैक्षणिक-सांस्कृतिक भ्रमण

जनजाति कल्याण केंद्र बरगांव, महाकोशल छात्रावास के विद्यार्थियों का शैक्षणिक-सांस्कृतिक भ्रमण

19–20 जनवरी 2026
जनजाति कल्याण केंद्र, बरगांव (महाकोशल) द्वारा संचालित छात्रावास के विद्यार्थियों के सर्वांगीण बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विकास के उद्देश्य से दिनांक 19 एवं 20 जनवरी 2026 को एक दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने घुघवा जीवाश्म पार्क, गर्म पानी कुंड, मंडला में माँ नर्मदा के दर्शन-पूजन एवं आरती तथा कान्हा नेशनल पार्क का अवलोकन किया।
घुघवा जीवाश्म पार्क: अतीत से संवाद
भ्रमण की शुरुआत घुघवा जीवाश्म पार्क से हुई, जहाँ विद्यार्थियों ने करोड़ों वर्ष पुराने वनस्पतियों के जीवाश्मों को देखा। मार्गदर्शकों द्वारा जीवाश्मों के वैज्ञानिक महत्व, पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास तथा जैव-विविधता के विकासक्रम पर विस्तार से जानकारी दी गई। इससे विद्यार्थियों में विज्ञान, भूगोल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिज्ञासा एवं समझ विकसित हुई।
गर्म पानी कुंड: प्रकृति और विज्ञान का संगम
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने गर्म पानी कुंड का भ्रमण किया। यहाँ प्राकृतिक रूप से निकलने वाले गर्म जलस्रोतों के पीछे के भू-तापीय कारणों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने यह जाना कि किस प्रकार प्रकृति के भीतर ऊर्जा के स्रोत सतत रूप से सक्रिय रहते हैं और मानव जीवन को प्रभावित करते हैं।
मंडला में माँ नर्मदा के दर्शन-पूजन एवं आरती
भ्रमण का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मंडला रहा, जहाँ विद्यार्थियों ने माँ नर्मदा के पावन तट पर दर्शन-पूजन एवं संध्या आरती में सहभागिता की। इस अवसर पर नर्मदा नदी के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सभ्यतागत महत्व पर प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों ने भारतीय परंपरा, आस्था और प्रकृति-पूजन की सनातन भावना को प्रत्यक्ष अनुभव किया।
कान्हा नेशनल पार्क: जैव-विविधता का जीवंत पाठ
दूसरे दिन विद्यार्थियों ने कान्हा नेशनल पार्क का शैक्षणिक भ्रमण किया। यहाँ उन्होंने बाघ, हिरण, बारहसिंगा सहित विभिन्न वन्य प्रजातियों के प्राकृतिक आवास को देखा। वन अधिकारियों एवं गाइड्स द्वारा वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी प्रदान की गई। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण शिक्षा का जीवंत अनुभव सिद्ध हुआ।
उद्देश्य और प्रभाव
इस दो दिवसीय भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकलकर प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान करना था। भ्रमण से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण की समझ, तथा राष्ट्रीय-प्राकृतिक धरोहरों के प्रति सम्मान का विकास हुआ।
जनजाति कल्याण केंद्र, बरगांव (महाकोशल) द्वारा आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संस्कार और प्रकृति से जुड़ाव का प्रेरक माध्यम बना। विद्यार्थियों ने इस यात्रा को अत्यंत उपयोगी, रोचक और स्मरणीय बताया तथा भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक-सांस्कृतिक भ्रमण आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की
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